
धर्म की खोई हुई भाषा
क्या हम सनातन धर्म को वास्तव में समझते हैं, या केवल उसकी कथाओं और परंपराओं को दोहराते हैं?
लेखक – चिराग अग्रवाल
यह पुस्तक क्यों पढ़ें?
आज अधिकांश लोग सनातन धर्म को मूल शास्त्रों के माध्यम से नहीं, बल्कि कथाओं, टीवी धारावाहिकों, सोशल मीडिया और प्रचलित मान्यताओं के माध्यम से जानते हैं। परिणामस्वरूप, धर्म के अनेक गहरे दार्शनिक, प्रतीकात्मक और आत्मपरिवर्तनकारी अर्थ धीरे-धीरे धुंधले पड़ गए हैं।
धर्म की खोई हुई भाषा पाठक को वेद, उपनिषद, भगवद्गीता, रामायण, महाभारत और अन्य शास्त्रीय स्रोतों के आधार पर सनातन धर्म की मूल दृष्टि से पुनः परिचित कराती है। यह पुस्तक श्रद्धा का विरोध नहीं करती; बल्कि श्रद्धा और समझ, भक्ति और विवेक, परंपरा और चिंतन के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती है।
यह पुस्तक किनके लिए है?
- वे पाठक जो सनातन धर्म को केवल मानना नहीं, बल्कि समझना चाहते हैं।
- विद्यार्थी एवं शोधार्थी जो भारतीय दर्शन और शास्त्रों का सरल परिचय चाहते हैं।
- वे लोग जो वेद, उपनिषद, भगवद्गीता, रामायण और महाभारत को उनके मूल संदर्भ में समझना चाहते हैं।
- श्रद्धालु जो भक्ति के साथ विवेक और आत्मचिंतन को भी महत्व देते हैं।
- प्रत्येक जिज्ञासु पाठक जो प्रश्न पूछने, विचार करने और स्वयं को भीतर से विकसित करने की इच्छा रखता है।
पुस्तक विवरण
- भाषा: हिन्दी
- प्रारूप: पेपरबैक
- पृष्ठ: १८७
- विषय: सनातन धर्म • भारतीय दर्शन • शास्त्र अध्ययन • आत्मचिंतन
- लेखक: डॉ. चिराग अग्रवाल
- प्रकाशन: Sanatana Revealed
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