
पर्व विवेक
शास्त्रों के माध्यम से पर्वों की वास्तविक समझ।
लेखक: चिराग अग्रवाल
यह पुस्तक क्यों पढ़ें?
क्या सनातन धर्म के पर्व केवल परंपराएँ हैं, या उनके पीछे कोई गहरा शास्त्रीय उद्देश्य भी है?
आज अनेक पर्व उत्सव के रूप में मनाए जाते हैं, पर उनके मूल सिद्धांत धीरे-धीरे अस्पष्ट होते जा रहे हैं। पर्व विवेक वेद, उपनिषद्, भगवद्गीता, रामायण और महाभारत जैसे मूल शास्त्रीय स्रोतों के आधार पर पर्वों, व्रतों और उत्सवों के वास्तविक उद्देश्य का अध्ययन प्रस्तुत करती है।
यह पुस्तक केवल यह नहीं बताती कि किसी पर्व को कैसे मनाया जाता है, बल्कि यह समझाती है कि उसे क्यों स्थापित किया गया, उसका आंतरिक उद्देश्य क्या है, और वह व्यक्ति के जीवन, अनुशासन तथा आत्मपरिवर्तन से कैसे जुड़ा है।
यह पुस्तक किनके लिए है?
- सनातन धर्म के पर्वों और व्रतों का शास्त्रीय आधार समझने वाले पाठकों के लिए।
- वे लोग जो परंपरा के साथ-साथ उसके पीछे के सिद्धांत भी जानना चाहते हैं।
- विद्यार्थी, शोधार्थी तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए।
- वे सभी जो बाहरी आचरण से आगे बढ़कर सजग और विचारपूर्ण जीवन की खोज में हैं।
पुस्तक विवरण
- प्रारूप: पेपरबैक
- पृष्ठ: 245
- भाषा: हिन्दी
विषय-सूची
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